Wednesday, October 23, 2019

श्री कृष्ण का विश्वस्त कौन?

मराठी भाषा में रहस्य उपन्यासों को बड़ी लंबी परंपरा है. साहित्य के इतिहास में मराठी उपन्यासकारों ने कई बेहतरीन रचनाएं प्रस्तुत की है. इन्हीं उपन्यास श्रृंखलाओं में हम 'वसंत वसंत लिमये'जी की "विश्वस्त" को शामिल कर सकते हैं. 'कृष्ण की द्वारका के खजाने का रहस्य' इस संकल्पना को केंद्र स्थान मानकर लिखा हुआ यह उपन्यास है. इसकी शुरुआत होती है, महाभारत काल से. फिर इसे बड़ी खूबी से चंद्रगुप्त काल, गजनवी का कालखंड, भारतीय स्वतंत्र पूर्वकाल खंड और आज के कालखंड से जोड़ा गया है. अधिकतम कथा आज के कालखंड से जुड़ी हुई है. जिसमें पांच मित्र आधुनिक काल में इतिहास की खोज में लगे हैं. इसमें से एक विदेशी युवती भी है. शिवाजी महाराज का किला विजयदुर्ग, मुंबई की सुरंगे, तथा नाशिक के भंडार दुर्ग किले से होकर यह कहानी गुजरात का मोड़ लेती है. सभी घटनाएं तथा पात्र बहुत बारीकियों से लिमयेजीने प्रस्तुत किए हैं. जिस वजह से यह उपन्यास शुरुआत से ही आखिर तक वाचको को कहानी में जुड़ा हुआ रखती है. इसी कारणवश इस उपन्यास को मराठी भाषा में लिखित अप्रतिम कलाकृति में शामिल किया जा सकता है.






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