Monday, August 13, 2012

’भारतीय’ बनाम ’एक था टायगर’



सलमान खान अभिनित बहुचर्चित फ़िल्म ’एक था टायगर’ इस १५ अगस्त को रीलीज़ होने वाली है. सलमान ख़ान की फ़िल्म कैसी भी हो, वो चलती है. ’बॉडीगार्ड’ तथा ’रेडी’ जैसी फ़िल्मों ने इस देश में रीकार्डतोड व्यवसाय किया था. ’एक था टायगर’ फ़िल्म को अधिकतम सिनेमाघर नहीं मिल रहें थें, इसलिये अब मराठी फ़िल्मों को महाराष्ट्र के सिनेमाघरों से निकालने की साजिश रची जा रही हैं.
हालही में रीलीज़ हुई मराठी ब्लॉकबस्टर फ़िल्म ’भारतीय’ महाराष्ट्र के सिनेमाघरों में हाऊसफुल चल रही है. इस फ़िल्म के करीब ४५० शोज़ महाराष्ट्र में दिखायें जा रहें हैं. लेकिन, सलमान की फ़िल्म पहले हफ़्तें अपने नये रीकार्ड बनाये, इसलिये ’भारतीय’ जैसी बेहतरीन फ़िल्म को महाराष्ट्र के सिनेमाचालक चार दिनों में ही बाहर का रास्ता दिखाने वाले हैं. पिछले कई सालों से इस राज्य में बॉलिवूडी फ़िल्में अपनी दादागिरी दिखती आई हैं. इसी का परिणाम स्वरूप आज ये दिन देखने को मिला है. बॉलिवूडी फ़िल्में यहां के मराठी लोगों को काफ़ी पसंद है. मराठी फ़िल्म कैसी भी हो वे देखने को नहीं जाते. बॉलिवूड का ग्लैमर उन्हें बहुत लुभाता है. इसलिये बॉलिवूड कलाकार मराठियों को अपना पहला दर्शक मानते है. इसी कारणवश मराठी फ़िल्मों को बॉलिवूड तथा मूर्ख मराठी दर्शक दुय्यम दर्ज़े का मानते है. मराठी फ़िल्में महाराष्ट्र मे टैक्स फ़्री होती हैं. इस के प्रदर्शन पर सरकार को कोई टैक्स नहीं मिलता. इसलिये, मराठी फ़िल्में चले या ना चले महाराष्ट्र सरकार को कुछ भी फ़ायदा नहीं होता. लेकिन, बॉलिवूड के लिये ऐसा नहीं है. इन फ़िल्मों से सरकार को अच्छा पैसा मिलता हैं. ’एक था टायगर’ के लिये टिकिट्स के रेट भी बढ़ा दिये है. पहले हफ़्तें फ़िल्म सभी अन्य फ़िल्मों का रीकार्ड तोड़ दे, इसलिये फ़िल्म के निर्माताओं ने यह चाल रची. सलमान ने इस पर नाराज़गी दिखाई लेकिन वे इस से बहुत खुश होंगे क्युंकी उनकी ’आमदनी’ बढने वाली है!
एक बॉलिवूड फ़िल्म के लिये बेहतरीन दर्ज़े की मराठी फ़िल्म के शोज़ बंद करवाना मराठी लोगों के लिये शर्म की बात है. ’भारतीय’ नाम से पता चलता है की, यह फ़िल्म किस तरह की है. राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता ’देऊळ’ के निर्माताओं ने यह फ़िल्म बनाई है. जितेंद्र ज़ोशी तथा सुबोध भावे जैसे मराठी अभिनेता इस फ़िल्म में मुख्य भुमिका में है. और आज़कल के बॉलिवूड में गये संगीतकार अजय-अतुल का संगीत इस फ़िल्म को मिला है. ऐसी फ़िल्म को अपने फ़ायदें के लिये बली चढ़ाने की साजिश सिनेमाचालक महाराष्ट्र में रची जा रही हैं. हमारे मराठी दर्शक तो इस बात से बहुत खुश होंगे की, अब उन की ’एक था टायगर’ देखने की इच्छापूर्ती होंगी. मुझे यकीन है की, ऐसी वारदात अगर कर्नाटक में या तमिलनाडू में हुई होती तो ज़रूर वहां के दर्शकों ने सिनिमाघरों को जला दिया होता! दक्षिण में लोग उन के ज़ुबान की ही फ़िल्म देखते है. लेकिन मराठी लोग बहुत ज़्यादा ही नेक दिल है. मराठी लोगों को शर्म आनी चाहिये जब  वो १५ अगस्त को ’भारतीय’ छोडकर बॉलिवूडी फ़िल्में देखें.

बॉलिवूड की अश्लिल फ़िल्मों के बादशाह की एक फ़िल्म महाराष्ट्र के सिनेमाघरों मे जोरशोर से चल रही है. जिस फ़िल्म को विदेश में बहुत बूरी तरह से पिटना पड़ा वह ’ए’ ग्रेड फ़िल्म यहा हाऊसफुल चल रही थी. इस फ़िल्म के नाशिक के सिनेमैक्स में आज भी रोज़ १० शो दिखायें जा रहे हैं. नाशिक जैसे छोटे शहर में भी यह अश्लिल फ़िल्म हिट चल रही है. ’एक था टायगर’ के लिये इस फ़िल्म को सिनेमाघर से बाहर हमारे सिनेमाचालक नहीं निकालना चाहते. क्युंकी, ऐसा करने पर इस फ़िल्म के महान निर्माता नाराज़ हो जायेंगे. ’भारतीय’ को बाहर निकालने पर ऐसा नहीं होगा, यह यकीन सलमान को है.
’भारतीय’ के लिये महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना तथा शिवसेना पहली बार किसी आंदोलन में एकसाथ नज़र आयी. यह महाराष्ट्र लिये एक शुभसंकेत है. मराठी के लिये वे हमेशा ही साथ-साथ लढ़ते रहेंगे, ऐसी आशा करता हूं.
कल मराठी न्युज़ चैनल ’एबीपी माझा’ पर सिनेमैक्स के एक पीआरओ ’भारतीय’ को अपने सिनेमाघर से बाहर निकालने की साजिश का बड़ी बेशरमी से समर्थन कर रहे थे. ऐसे लोगों से ही मराठी फ़िल्मों को बड़ा ख़तरा है. अब सिर्फ़ मराठी दर्शक ही दिखा सकते है, की मराठी फ़िल्में चलेगी या बॉलिवूडी राज कायम रहेगा...

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