Friday, June 3, 2011

मै और क्रिकेट

एक भारतीय होने के नाते मेरा भी यह फ़र्ज़ बनता है की, मै भी क्रिकेट को सबसे ज़्यादा प्यार करू. इसलिए हर भारतीय की तरह मै भी क्रिकेट का चहिता हूं. बचपन से ही हम क्रिकेट खेलते आये है. लेकिन १९९६ के विश्वकप के बाद मै टीवी पर भी क्रिकेट की मॅचेस देखने लगा. स्वदेश मे हुए इस विश्वकप मे भारत बूरी तरह से श्रीलंका से हार गया था और श्रीलंकाई टीम बहुत तेज़ी से उभर आई थी. विश्वकप के बाद भारतीय टीम मे बहुत से बदल किए गए. राहुल द्रविड और सौरव गांगुली इसी दौरान भारत के राष्ट्रीय टीम मे शामील हुए थे. सचिन तेंडुलकर तो पहले से ही टीम मे थे.

इन तीनों मे से मुझे सौरव गांगुली की बल्लेबाज़ी बहुत अच्छी लगती थी. ख़ास कर उस के ऑफ़साईड मे मारे हुए शॉट्स लाजवाब थे. सभी बल्लेबाजों मे मुझे सौरव गांगुली की ही बल्लेबाज़ी पसंद थी. मै ख़ुद एक दाहिने हाथ का बल्लेबाज़ था, लेकिन गांगुली की तरह बाए हाथ से बल्लेबाज़ी करने लगा. मै उस की नकल करने की कोशिश करता था. शुरूआत मे मुझे इस तरह बल्लेबाज़ी करना बहुत ही कठीन लगता था. लेकिन सोचता की, सौरव भी तो मूलत: दाहिने हाथ वाला है. अगर वो बाए हाथ से बल्लेबाज़ी कर सकता है तो मै क्यूं नहीं? धीरे धीरे मै बाए हाथ से बल्लेबाज़ी करने लगा. इसी दौरान मै गेंदबाज़ी की भी प्रॅक्टीस करता था. इसलिए साऊथ आफ़्रिका के एलन डोनाल्ड ने मुझे प्रभावित किया था. गेंदबाज़ी मे मै डोनाल्ड की नकल उतारता था. बाए हाथ से बल्लेबाज़ी करते रहने की वजह से मुझे दाहिने हाथ से बल्लेबाज़ी करनी बहुत ही आसान लगने लगा था. किसी चीज़ को अगर आप और कठिनाई मे जा कर सोचे तो पहले वाली चीज़ें आसान लगने लगती है. ठीक इसी तरह मेरे साथ भी हुआ. लेकिन मैने इस दौरान दाहिने हाथ से बल्लेबाज़ी के बारे मे सोचा नहीं.

क्रिकेट मे बल्लेबाज़ी से गेंदबाज़ी करना अधिक कठीन होता है. यह बात मुझे समझ मे आई थी. इसलिए बल्लेबाज़ी की बजाए मै गेंदबाज़ी की अधिक प्रॅक्टीस करता था. क्रिकेट मे समझो की गेंदबाज़ी मेरा पॅशन बन गया था. घर पर कोई नही होता तो, किसी दीवार को सामने रखकर वहां गेंदबाज़ी करता था. क्युंकी अकेला आदमी बल्लेबाज़ी की नही लेकिन गेंदबाज़ी की तो प्रॅक्टीस कर सकता है! ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मॅग्रा की गेंदबाज़ी ने मुझे प्रभावित किया था. साधारन गती से केवल लाईन और लेंथ के जोर पर आप कितनी अच्छी गेंदबाज़ी कर सकते है यह मैने मॅग्रा से सीखा. गांगुली रीटायर होने के बाद मैने बाए हाथ की बल्लेबाज़ी छोड दी. आज भी मै क्रिकेट मे गेंदबाज़ी को अपना पॅशन मानता हूं. कल बहुत दिन बाद मैने मैदान पर गेंदबाज़ी की थी. तब यह सब यादें ताज़ा हो गई.

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